बिजली कटौती की ‘थर्ड डिग्री’ यातना ...
आजकल उत्तर प्रदेश की जनता बेहद खौफ़ज़दा है। हर पल डर के साए मे जीवनयापन करने वाली जनता अमित शाह के चुनावी खेल मे भाग लेकर खासा परेशान है। वह पछता रही है। जनता जिस खेल मे स्वयं को ‘मैन ऑफ दि मैच’ समझने के प्रवंचन मे थी, उसमे वह बस पानी पिलाने वाले खिलाड़ी की तरह ही थी। अच्छे दिन के जोश मे, उत्तर प्रदेश की जनता ने वोट को शक्ति समझने का जो कांड कर डाला, उसका खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। चुनाव के दो माह चार दिन की चाँदनी के समान थे और अब हमारे जीवन मे अंधेरी रातें मात्र ही बची हैं।
खैर, मैं बात कर रहा था जनता (हमारे) के खौफ़ज़दा होने की। चौंकिए मत जनाब! यू पी वाले बलात्कार, चोरी, डकैती, हत्या, घूसख़ोरी, फिरौती आदि से अब कदापि भयभीत नहीं होते हैं। नेता जी के आशीर्वाद से लोगो को अब इनकी आदत सी है। उत्तर प्रदेश का आई एस आई एस तो ‘बिजली कटौती’ है, जिससे जनता बड़ी आतंकित रहती है। प्रदेश के हुक्मरानों को पता है कि आमजन को ‘सबक’ सीखाने हेतु बिजली कटौती से अच्छी ‘थर्ड डिग्री’ प्रताड़ना नहीं हो सकती है। आलम यह है कि हम रात भर बिजली के स्वागत मे बाहें बिछाए रहते हैं, किन्तु ये बिजली एक्सप्रेस है कि इटावा स्टेशन से हिलने का नाम ही नहीं लेती है। जनता बिजली के गमनागमन से वैसे ही आतंकित महसूस कर रही है जैसे हमास के लोग बम वर्षा से भयभीत हैं।
मेरे परम मित्र ने मुझे बताया कि उन्होने सरकार को एक हलफ़नामा और माफ़ीनाम भेजा है। जिसमे उन्होने लिखा है कि वे अपनी भूल स्वीकार करते हैं। आगामी चुनावों मे वे इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे कि ‘अपने प्रदेश’ मे सरकार किसकी है और उसका कार्यकाल कितना बचा हुआ है। अब वोट को अपनी ताकत नहीं, वरन मजबूरी समझ उसका क्रियान्वयन करेंगे।
मित्र को इतना आतंकित देखकर मैं भी आतंकित हो गया हूँ। अपने घर के सारे विद्युत उपकरण की तस्वीरें ओएलएक्स पे अपलोड कर दी हैं। किन्तु वहाँ यह समस्या है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश लोग उपकरण खरीदना नहीं बल्कि खुद बेचना चाहते हैं। दूसरे प्रदेशों के लोग यह कह कर मुंह मोड़रहे हैं कि जो उपकरण लंबे समय तक बंद पड़े हों, वे अमूमन काम करना बंद कर देते हैं।
- अभिषेक अवस्थी
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