Wednesday, 3 June 2015

हैप्पी बड्डे सरकार...

हैप्पी बड्डे सरकार...
सुना है सरकार का बड्डे हैवो भी हैप्पी वाला! कमाल है जीराष्ट्रीय छुट्टी भी नही घोषित हुई। अच्छे दिनबुलेट ट्रेन काला धन आदि नही आएन सही। किंतु भईपहले जन्मदिन के उपलक्ष्य मे आम टाइप वाले भाइयोंबहनों और मित्रों को एक अदद केक का टुकड़ा ही डाल देते। ख़ैरजहां देखा चारा वहां मुँह मारा की तर्ज़ पर एक नामी न्यूज़ चैनल के रिपोर्टरसरकार को जन्मदिन की बधाई देने के बहाने उनका साक्षात्कार कर लाए। उसी का कुछ भाग पेश-ए-खिदमत है-  
रिपोर्टर- सरकारश्रीआपको जन्मदिन की बधाई।
सरकर- ठीक हैअपने 'केक का टुकड़ालो और अपनी पर आ जाओ।
रिपोर्टर- आप एक वर्ष के हो गए। कैसा लग रहा है।
सरकर- सबकुछ नया नया सा लग रहा है। अभी तो पूरी दुनिया देखनी बाकी है। रिपोर्टर- तो आगे की क्या योजना हैसरकार - कहा न! दुनिया देखनी हैजश्न मनाना हैसरकार रूपी जन्म बार बार थोड़ी न मिलता है भाई।
रिपोर्टर- और कितने दिन जश्न मनाएंगेसरकार- जब तक बालिग नही हो जाते।
रिपोर्टर - अच्छाये मेक इन इंडिया का बड़ा शोर है। लेकिन जमीनी स्तर पे कुछ होता तो दिख नही रहा।
सरकार- क्यों नही होता दिख रहा है?  आदमी साल भर से ब रहा हैऔर हम बना रहे हैं। तो हुआ न मेक इन इंडिया?
रिपोर्टर- तो ऐसे विकास कैसे होगासरकार- देखोहर आदमी का विकास स्वयं उसका ही दायित्व है। इसमे हम क्या करेंहम तो 'अपनेविकास के दायित्व को तत्परता से पूर्ण करने हेतु शपथबद्ध हैं। रिपोर्टर- ओह! इस विषय मे थोड़ा विस्तार से बताइए।
सरकार- तुम रिपोर्टर लोग हमेशा बाल की खाल निकालने मे लगे रहते हो। देखोहमने न्यायपालिका को लगभग अपने कब्जे मे कर लिया है। तुम लोगो को तो पता ही होगाकैसे दनादन फैसले पे फैसले आ रहे हैं आजकल। एक दोहा टाइप सुनो, " पावर और पैसे काऐसा देखा मेल... तेरह साल मे जेल हुई,घंटे भर मे बेल..." हम तो इसी दोहे पे भरोसा रखते हैं। वो जुमला तो सुना होगा न "सबका साथसबका विकास"। बस थोड़ा फ़ेरबदल हुआ है उसमे। अब हो गया है, "सबका साथ,अपना विकास" रिपोर्टर- आपका जन्म हुए एक वर्ष बीत गया है। क्या कुछ ख़ास हुआ आपके साथ या आपने क्या ख़ास कियासरकार- बहुत कुछ ख़ास किया हमने। योजनाओं पे योजनाएँ लॉन्च करी। जैसे जनधन योजना। जनता का धनपहले बैंकों मे जाएगाफ़िर व्यापारियों के पासतत्पश्चात जोड़जाड़ के हमारे पास आयेगा। हमने ताबड़तोड़ विदेश यात्राएं करी। स्वच्छता अभियान लॉन्च किया। बेटी पढ़ाओबेटी बचाओ मिशन लॉन्च किया। और तो और मंगल यान भी हमने ही लॉन्च किया।
रिपोर्टर- लेकिन स्वच्छता तो चुनावी जुमला टाइप हो गयी है। जमीनी स्तर पे दिखती ही नही है। और बेटियां पढ़ने-बचने की बजाय मर-कट रहीं हैं।
सरकार- देखोदोनों ही मामलों मे हम यही कहेंगे कि आदमी का विकास उसका ख़ुद का काम है।
रिपोर्टर- अच्छाआपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या हैसरकार- जी, 'घोषणाको 'चुनावी जुमलासिद्ध करना। जनता मे अब भी यह विश्वास बनाए रखना कि अच्छे दिन आएँगे।
रिपोर्टर- हमारे न्यूज़ चैनल के माध्यम से आप अपने जन्मदिन पर जनता को कुछ संदेश देना चाहेंगे। सरकार- जी ज़रूर। मित्रों... अच्छे दिन आएँगे। अवश्य आएँगेबस हमें बालिग होने दीजिए। अच्छे  दिन बुलेट ट्रेन की गति से आएँगे। हाँआप ध्यान रखें कि काला चश्मा धारण न करें। वरना बुलेट ट्रेन की गति से आ रहे अच्छे दिन आपको दिखेंगे नही। फ़िर आप हम पे दोषारोपण करेंगे कि अच्छे दिन सरपट निकल गए और बुलेट ट्रेन आप को ही रौंद करविदेश भ्रमण पे निकल गयी। धन्यवाद!          
                        -अभिषेक अवस्थी

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